अशिक्षा रूपी अंधकार को दूर करने पिछले 6 वर्षों से शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू है। यह कानून ही काफी नहीं है। इसलिए अब समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। समाज की सहभागिता के बगैर अशिक्षा का खात्मा करना मुमकिन नहीं है। यह बात मप्र बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डा. राघवेंद्र शर्मा ने जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को हुई आरटीई वर्कशाप में कही।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बुन्देलखंड प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि शिक्षक अपने जीवन भर की कमाई शिक्षा के रूप में बच्चों को देते हैं। शिक्षा ही जीवन का मूल आधार है। माता, पिता और गुरू तीनों ही बालक की मानसिकता को बदलते हैं। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने लोकतंत्र के बाद शिक्षा के विकास के लिए बहुत काम किए। अनिवार्य शिक्षा के लिए 16 फरवरी 2010 से निशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया। विश्वास के साथ यह कहते हुए गर्व होता है कि जन अभियान परिषद ने हमारे जीवन के हर पहलू में प्रवेश किया और लोगो को जगाने का काम किया है ।
अतिथियों ने दो घंटे कराया इंतजार
इस वर्कशाप का शुभारंभ निर्धारित समय सुबह 10.30 बजे के बजाए पूरे घंटे देर से दोपहर 12.30 बजे हुआ। वजह यह रही कि मुख्य अतिथि डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डा. राघवेंद्र शर्मा दोपहर 12.25 बजे कार्यक्रम स्थल पर आए।
वर्कशाप में बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डाॅ. शर्मा ने बताया कि दुनिया की आबादी के 19 प्रतिशत बच्चे तो सिर्फ भारत में हैं। इनके लिए सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून बनाया है। कानून को सफल बनाने का संकल्प हम सभी को लेना होगा। वर्ष 1917 में प्राइवेट क्षेत्र में विट्ठल भाई पटेल ने शिक्षा का अधिकार लागू किया। इससे पहले ब्रिटिश शासन में एक ऐसा प्रस्ताव भी रखा गया था। जिसमें शराब बिक्री से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में किए जाने की बात कही गई थी। लेकिन उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। हालांकि वर्ष 1947 से समाज के सहयोग से अनिवार्य शिक्षा कानून लागू किया गया था। लेकिन वह ज्यादा प्रभावी नहीं रहा। इस कारण शिक्षा का अधिकार अधिनियम के सहारे अशिक्षा को दूर किए जाने के प्रयास हो रहे हैं। समाजसेवी मीना पिंपलापुरे और जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष डॉ. अंकलेश्वर दुबे ने भी वर्कशाप में अपने विचार रखे। इनके अलावा शिक्षाविद् एमडी त्रिपाठी ने निशुल्क शिक्षा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन राजेश पंडित ने किया। आभार परिषद के जिला समन्वयक केके मिश्र ने जताया।
सागर. जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित कार्यशाला में बड़ी संख्या में शिक्षा विभाग के लोग शामिल हुए।
इनसेट : मप्र बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष संबोधित करते हुए।
सरकारी नौकरी - Army /Bank /CPSU /Defence /Faculty /Non-teaching /Police /PSC /Special recruitment drive /SSC /Stenographer /Teaching Jobs /Trainee / UPSC
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बुन्देलखंड प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि शिक्षक अपने जीवन भर की कमाई शिक्षा के रूप में बच्चों को देते हैं। शिक्षा ही जीवन का मूल आधार है। माता, पिता और गुरू तीनों ही बालक की मानसिकता को बदलते हैं। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने लोकतंत्र के बाद शिक्षा के विकास के लिए बहुत काम किए। अनिवार्य शिक्षा के लिए 16 फरवरी 2010 से निशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया। विश्वास के साथ यह कहते हुए गर्व होता है कि जन अभियान परिषद ने हमारे जीवन के हर पहलू में प्रवेश किया और लोगो को जगाने का काम किया है ।
अतिथियों ने दो घंटे कराया इंतजार
इस वर्कशाप का शुभारंभ निर्धारित समय सुबह 10.30 बजे के बजाए पूरे घंटे देर से दोपहर 12.30 बजे हुआ। वजह यह रही कि मुख्य अतिथि डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डा. राघवेंद्र शर्मा दोपहर 12.25 बजे कार्यक्रम स्थल पर आए।
वर्कशाप में बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डाॅ. शर्मा ने बताया कि दुनिया की आबादी के 19 प्रतिशत बच्चे तो सिर्फ भारत में हैं। इनके लिए सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून बनाया है। कानून को सफल बनाने का संकल्प हम सभी को लेना होगा। वर्ष 1917 में प्राइवेट क्षेत्र में विट्ठल भाई पटेल ने शिक्षा का अधिकार लागू किया। इससे पहले ब्रिटिश शासन में एक ऐसा प्रस्ताव भी रखा गया था। जिसमें शराब बिक्री से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में किए जाने की बात कही गई थी। लेकिन उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। हालांकि वर्ष 1947 से समाज के सहयोग से अनिवार्य शिक्षा कानून लागू किया गया था। लेकिन वह ज्यादा प्रभावी नहीं रहा। इस कारण शिक्षा का अधिकार अधिनियम के सहारे अशिक्षा को दूर किए जाने के प्रयास हो रहे हैं। समाजसेवी मीना पिंपलापुरे और जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष डॉ. अंकलेश्वर दुबे ने भी वर्कशाप में अपने विचार रखे। इनके अलावा शिक्षाविद् एमडी त्रिपाठी ने निशुल्क शिक्षा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन राजेश पंडित ने किया। आभार परिषद के जिला समन्वयक केके मिश्र ने जताया।
सागर. जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित कार्यशाला में बड़ी संख्या में शिक्षा विभाग के लोग शामिल हुए।
इनसेट : मप्र बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष संबोधित करते हुए।
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