विदिशा।
मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक शिक्षा के क्या हाल हैं? उसे
बयां करने के लिए विदिशा जिले की ये एक खबर ही काफी है। यहां के बरबटपुरा
स्कूल में दूसरे बोर्ड पर लिखा नाम देखकर बोर्ड पर शिक्षक का नाम लिखने का
प्रयास करती पांचवीं की ये छात्रा बता रही है कि उसे लिखना, पढऩा कुछ भी
नहीं सिखाया गया।
किसी को लिखना नहीं आता
शमशाबाद
से मात्र 4 किमी दूर बरबटपुरा में ऐसी ही शासकीय प्राथमिक शाला है। यहां
दो शिक्षक पदस्थ और कुल 10 विद्यार्थी दर्जहैं। किसी दिन कोई दो-तीन
विद्यार्थी आते हैं तो अगले दिन दूसरे दो-तीन। अचरज तो इस बात का है कि दो
शिक्षक और दस विद्यार्थियों वाले स्कूल में पांचवी तक के बच्चे न तो एक
लाइन पढ़ पाते हैं और न ही लिख पाते हैं। ये बच्चे बोर्ड पर देखकर लिखा हुई
कोई इबारत नहीं पढ़ पाते। वे पाठ भी नहीं पढ़ सकते।
टीचर कभी आते, कभी नहीं आते
शमशाबाद
ब्लॉक की इस प्राथमिक शाला में शाहिद खां और गीता कुंभकार के रूप में दो
शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन विद्यार्थी इक्का-दुक्का ही मिलते हैं। कभी तो वे
भी नहीं आते। जब हमने वहां का दौरा किया तो स्कूल में मौजूद दो लड़कियों
में से मात्र एक ही शाला की विद्यार्थी थी, दूसरी तो उसके साथ आ गईथी। हमने
छात्रा से नाम पूछा-जवाब मिला रामवती। सर का नाम क्या है? पता नहीं। मैडम
का नाम ही बता दो? छात्रा ने जवाब दिया- उन्होंने हमें कभी बताया ही नहीं।
हमने कहा- नाम हम बताते हैं, लिखकर बताओगी? वह बोली- नहीं लिख पाएंगे। फिर
हमने बोर्ड पर लिखे शिक्षक के नाम को देख-देखकर लिखवाने का प्रयास किया,
लेकिन पांचवी की यह छात्रा वह भी सही नहीं लिख पाई। यह सब दोनों शिक्षकों
की मौजूदगी में हुआ। जिसकी वीडियो भी हमारे पास है। फिर हमने शाला प्रभारी
शाहिद खां से पूछा कि क्या स्कूल का कोई बच्चा एक लाइन भी पूरी लिख सकता
है? वे बोले मुश्किल है। कोई नहीं लिख पाएगा।