इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग महाविद्यालय में अतिथि विद्वान की नियुक्ति को लेकर प्रबंधन की मनमानी का मामला सामने आया है। शासन ने सत्र 2018-19 के लिए वर्तमान में कार्यरत अतिथि विद्वानों की ही नियुक्ति करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन प्रबंधन ने आदेश को दरकिनार करते हुए पहले पुराने अतिथियों को अयोग्य बताकर बाहर किया और अब विज्ञापन जारी कर नए अतिथियों की नियुक्ति की जा रही है। जिसके बाद अब पुराने अतिथि महाविद्यालय के विरुद्ध कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
कॉलेज ने दो बार निकाला विज्ञापन, लेकिन नियुक्ति अब तक नहीं : इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग महाविद्यालय में सत्र 2018-19 के लिए अतिथि विद्वानों की चयन प्रक्रिया सबसे पहले जून माह में शुरू हुई थी। इस दौरान 26 और 27 जून को इंटरव्यू भी आयोजित किए गए, लेकिन 30 जून को आए शासन के आदेश के बाद यह प्रक्रिया रोक दी गई। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वर्तमान में कार्य कर रहे अतिथि विद्वानों को ही आगामी सत्र में रखा जाए।
इसके लिए कोई भी विज्ञापन या चयन प्रक्रिया आयोजित करने की जरूरत नहीं है। प्रबंधन ने इसके बाद भी 21 जुलाई को सभी ब्रांचों में अतिथि विद्वानों के लिए आवेदन बुला लिए और इंटरव्यू प्रक्रिया भी पूरी कर ली। हालांकि अभी तक चयनितों को नियुक्ति पत्र नहीं दिए गए हैं।
प्रभावित हो रही विद्यार्थियों
की पढ़ाई
प्रबंधन अपनी मनमानी के चलते शासन का आदेश के अवहेलना के साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। 2 जुलाई से कॉलेज शुरू हो चुके हैं, लेकिन अब भी सभी ब्रांचों में 15 से भी ज्यादा अतिथि विद्वानों के पद खाली है और एक माह से क्लासेस भी नहीं लग रही।
ऐसे चल रहा योग्यता घटाने और बढ़ाने का खेल
मामले को लेकर जब महाविद्यालय के प्राचार्य से बात की गई तो उन्होंने विज्ञापन जारी करने का कारण पुराने अतिथियों का कम क्वालिफाइड होना बताया और पुराने प्राचार्य की गलतियां गिनाने लगे। लेकिन इन्हीं प्राचार्य ने 26 जून को जारी किए गए विज्ञापन में न्यूनतम योग्यता बीई और एमएससी मांगी थी। लेकिन अब एमफिल जैसे डिग्री होल्डर्स को भी बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं।
सीधी बात
एनएल प्रजापति, प्राचार्य आईजीसी सागर
शासन के आदेश के बाद भी आपने नए अतिथियों के लिए विज्ञापन जारी क्यों किया?
- फिलहाल जो अतिथि काम कर रहे थे उनकी योग्यता काफी कम थी। इसलिए ऐसा करना पड़ा।
लेकिन यही शिक्षक पिछले साल भी आपके कॉलेज में थे, तब आपको योग्यता कम क्यों नहीं लगी?
- मैं तो अभी आया हूं। यह तो तत्कालीन प्राचार्य की गलती है।
क्या आपने विज्ञापन निकालने से पहले शासन से अनुमति ली थी?
- हमारे पास डायरेक्टर सर की अनुमति है और जल्द ही हम नियुक्ति पत्र नए अतिथियों को दे देंगे।
अयोग्य बताकर मनमानी की जा रही है
मैंने फिजिक्स से एमफिल किया है और पिछले तीन साल से गेस्ट फैकल्टी के तौर पर महाविद्यालय में काम कर रही थी। लेकिन इसके बावजूद भी मुझे अयोग्य बताकर बाहर कर दिया गया, ये कैसी मनमानी है। -स्वाति कुर्मी, अतिथि विद्वान
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