विधानसभा चुनाव की आचार संहिता को लेकर अध्यापकों के संविलियन पर रोक लग गई
है। लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त जयश्री कियावत ने इस संबंध में जिला
शिक्षा अधिकारी को आदेश जारी कर नवीन संवर्ग में कोई भी नियुक्ति आदेश जारी
करने से मना कर दिया है। उनके इस आदेश के बाद करीब पांच हजार अध्यापकों की
चिंता बढ़ गई है।
यहां बता दें कि जिले में पांच हजार 422 अध्यापक हैं, जिसमें वर्ग एक
में 200, वर्ग दो में 1876 और वर्ग तीन में तीन हजार 346 अध्यापक हैं। यह
अध्यापक पिछले कई सालों से शिक्षा विभाग में संविलियन की मांग को लेकर
आंदोलनरत थे।
मांग पूरी करने के जारी किए आदेश
वहीं सरकार द्वारा चुनावी साल में अध्यापकों की इस मांग को पूरा करने
के आदेश जारी कर दिए थे। इसके तहत जिले में संविलियन की कार्रवाई चल रही
थी। तभी छह अक्टूबर को प्रदेश में आचार संहिता के प्रभावी होते ही यह मामला
फिर से खटाई में चला गया है। लेकिन बुधवार को लोक शिक्षण संचालनालय की
आयुक्त जयश्री कियावत ने भर्ती नियम 2018 के तहत अध्यापक संवर्ग के
व्यक्तियों को नवीन शैक्षणिक संवर्ग में नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल
प्रभाव से स्थगित कर दिया है। वहीं इस पत्र के जारी होते ही अध्यापक संवर्ग
की चिंता बढ़ गई है। वहीं कुछ अध्यापक नेताओं में इसे लेकर आक्रोश भी है।
लेकिन आचार संहिता के चलते वे अपना विरोध भी प्रकट नहीं कर पा रहे हैं।
अध्यापक नेता टीकम सिंह का कहना है कि सरकार द्वारा जानबूझकर संविलियन की
प्रक्रिया को इतना जटिल कर दिया गया था, कि आचार संहिता लगने से पहले पूरी
नहीं हो सकती थी। परिणामस्वरूप अब अध्यापकों को संविलियन के लिए फिर सालों
इंतजार करना पड़ेगा।
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