जिले के सरकारी स्कूलों में खाली पदों पर ऑनलाइन तरीके से अतिथि शिक्षकों
की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इस भर्ती प्रक्रिया से 70 से 80 फीसदी
पुराने अतिथि शिक्षक बाहर हो गए हैं।
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पहले से ही निर्धारित है भर्ती करने की पूरी प्रक्रिया
अतिथि शिक्षकों की भर्ती करने के लिए जो अॉनलाइन प्रक्रिया चल रही है, वह
पहले से ही निर्धारित है। संविलियन होने के बाद कई पद भर गए हैं तो कई जगह
खाली हो गए हैं। ऐसी स्थिति में पाेर्टल पर जगह खाली दिख रही है, लेकिन
वहां पर पद संविलियन के बाद भर चुका है। ऐसे मामले में अतिथि शिक्षकों को
दूसरे विकल्प वाले स्कूलों का चयन करना चाहिए था। -आरपी सेन, जिला शिक्षा
अधिकारी रायसेन
स्कूलों का हुआ उन्नयन, भवन मिला न शिक्षक
सिवनी. माध्यमिक शाला से उन्नयन किए गए हाइस्कूल और हायर
सेकण्डरी स्कूलों में अब तक शिक्षकों की पदस्थापना नहीं की गई है। माध्यमिक
स्कूल के शिक्षकों के भरोसे ही नवीन हायर सेकेण्डरी और हाइस्कूल की पढ़ाई
चल रही है।
नौकरी चले जाने से अतिथि शिक्षकों की रोजी-रोटी पर आया संकट
रायसेन | रायसेन जिले
के सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए अतिथि
शिक्षकों की भर्ती ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से हो रही है | ऑनलाइन
प्रक्रिया के कारण पुराने अतिथि शिक्षक 70% से लेकर 80% तक स्कूलों से बाहर
हो गए हैं |
शिक्षकों के सेवा भर्ती नियम जारी, 2.35 लाख अध्यापकों को मिलेगा लाभ
भोपाल, 31 जुलाई (उदयपुर किरण). मध्यप्रदेश में राज्य शासन द्वारा
मंगलवार को राज्य शिक्षा सेवा के तहत शिक्षकों के सेवा भर्ती नियम जारी कर
दिए हैं. प्रदेश के करीब दो लाख 35 हजार अध्यापकों का इसका लाभ मिलेगा.
अध्यापक संवर्ग का संविलियन: मप्र शासन का आधिकारिक प्रेस रिलीज
भोपाल। प्रदेश के 224 सामुदायिक
विकासखण्डों में स्कूल शिक्षा विभाग की शैक्षणिक संस्थाओं में कार्यरत
अध्यापक संवर्ग की सेवाओं का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन कर दिया गया
है। इसका नोटिफिकेशन मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) में 30 जुलाई, 2018 को
कर दिया गया है।
केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, नियोजित शिक्षक नहीं हैं नियमित शिक्षकों के बराबर
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बिहार सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि नियोजित शिक्षक नियमित शिक्षकों के समान नहीं है। नियोजित शिक्षकों को प्रतियोगी परीक्षा के बाद मेरिट के आधार पर भर्ती किये गए नियमित शिक्षकों के बराबर नहीं माना जा सकता।
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