शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ, शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ ।
नियम एक मैं शाश्वत हूँ, शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ।।
मूरत गढ़ता पाषाणों में, ऐसी एक महारत हूँ ।
शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ ।।
वात्सल्य हूँ माँ के उर का, और पिता सी छाया हूँ,
अंधकार में दीपक हूँ ।
शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ ।।
विधि ने मुझ पर किया भरोसा,उपवन एक मुझे भी सौंपा, इस बगिया का का रक्षक हूँ ।
शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ ।।
कल्पवृक्ष बनने की क्षमता, जिस अनन्त से आती है,
उस अनन्त का परिचायक हूँ ।
शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ ।।
गुरु-शिष्य की पावन धारा,आदि काल से बहती है,
मैं वह निर्मल धार सतत हूँ ।
शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ ।।
आसमान को छूने वाले, तरु के बीज बनाता हूँ,
एक अमिट हस्ताक्षर हूँ ।
शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ ।।
ज्ञान वृष्टि करता रहता, फल की ना इच्छा रखता,
कर्मयोग में तत्पर हूँ ।
शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ ।।
विश्व-प्रेम स्थापन को ही, सारे जग का शिक्षक हूँ,
इसीलिए मैं आवश्यक हूँ ।
शिक्षक हूँ मैं शिक्षक हूँ ।।
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
Pay-scale / Merit / Counseling / Appointment / Transfer / Court - case & all Madhya Pradesh latest news - Source of Reliable Information
Social Media Link
Important Posts
UPTET news
Advertisement
Related Posts
';
(function() {
var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true;
dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js';
(document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq);
})();