फर्जी दस्तावेजों से संविदा शाला शिक्षक बनने वाले 49 शिक्षकों को जहां
जिला प्रशासन ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वहीं शक के दायरे में शामिल
17 शिक्षकों को जिला प्रशासन एक ओर मौका देने का मन बना रहा है। इसके लिए
शीघ्र ही इन शिक्षकों को फिर से नोटिस जारी किए जाएंगे।
यदि वे अपने
दस्तावेजों का सत्यापन नहीं करा पाते हैं तो इनकी भी सेवाएं समाप्त हो सकती
है।
यहां बता दें कि जिले में वर्ष 2006, 2009 और 2011 में हुई संविदा शाला
शिक्षक भर्ती में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी। वर्ष 2014 में जब यह मामला
खुला तो तत्कालीन कलेक्टर एम सिबि चक्रवर्ती ने मामले की जांच कराई। जिले
में 73 शिक्षकों का भर्ती रिकार्ड संबंधित जनपद पंचायतों में नहीं मिला।
वहीं यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। इसके बाद प्रशासन ने शक के दायरे में
इन शिक्षकों से उनके मूल दस्तावेज मांगे। साथ ही उनका वेरीफिकेशन कराया
गया। इसमें 49 शिक्षक ऐसे मिले जिनके व्यापमं की अंकसूची का वेरीफिकेशन
कराने पर वह किसी दूसरे परीक्षार्थी के नाम निकली। वहीं कुछ शिक्षकों की
व्यापमं की अंकसूची में अंकों हेराफेरी की गई। इसके अलावा डीएड बीएड के अंक
पाने के लिए भारतीय पुनर्वास परिषद दिल्ली, शिक्षा परिषद लखनऊ की फर्जी
अंकसूचियां लगाई गई। वेरीफिकेशन में वहां इन छात्रों के नाम ही नहीं मिले।
साथ ही अनुभव के 15 अंक भी इन्हें फर्जी तरीके से दिए गए। इसके अलावा
काउंसलिंग में बुलाए बगैर तथा चयन सूची में नाम न होने पर भी उन्हें
नियुक्ति पत्र दिए गए। जांच में इन शिक्षकों पर दोष सिद्ध होने पर जिला
पंचायत सीईओ सपना निगम ने इनकी सेवाएं समाप्त कर दी। वहीं 17 शिक्षक अभी
जांच की जद में है। बताया जा रहा है कि इनमें से एक शिक्षक ने अपनी व्यापमं
की अंकसूची की वेरीफिकेशन कराकर जांच टीम को सुपुर्द कर दी है।
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